इस विश्वकप के पिछले कुछ मैचों ने मुझे सोचने पर मजबूर कर

इस विश्वकप के पिछले कुछ मैचों ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर मै किसे बहुत बङा बल्लेबाज मानूं या किसे बहुत बङा गेंदबाज मानूं? कौन सी टीम को बङी और खतरनाक टीम मानूं और कौन सी टीम को मै साधारण टीम मानूं? बल्लेबाजों के विषय में गहन अध्ययन करने के बाद यह पता चला है कि एशियाई बल्लेबाज स्विंग को मदतगार पिचों पर फेफङे के बल खङे होकर बल्लेबाजी करते दिखते हैं वहीं सेना देशों के बल्लेबाज स्पिनर को मदतगार पिचों पर बल्ले की बजाय आंखों से खेलते नजर आते हैं। मतलब साफ है कि आजकल बल्लेबाजों की स्किल लगभग लगभग शून्य है। अगर मैदान फ्लैट होगा तभी 350 रन बना पाएंगे अन्यथा आज हमने इंग्लैंड को डेढ सौ पर आलआउट होते हुए भी देखा है।

सही बात तो यह है कि बल्लेबाज वही है जो किसी भी पिच पर रन बनाने की क्षमता रखे। हमने विराट कोहली को इस श्रेणी मे रखा है जो किसी भी पिच पर रन बना सकते हैं। एक महान बल्लेबाज कभी भी रन बनाने के लिए पिच की सहायता पर निर्भर नही होता है।

ऐसा लगता है जैसे इंग्लैंड के सभी बल्लेबाज केवल पिच कैसे रन बनाने के लिए मदत करेगी शायद इसी बात पर निर्भर हैं और शायद यही वजह है कि उस इंग्लैंड की भी हिम्मत नही हुई कि दो सौ रन बना दे स्पिन फ्रेन्डली विकेट पर जिसके पास विश्वस्तरीय हिटर हैं जहां आस्ट्रेलिया भी दो सौ रन नही बना सका था। आज का मैच यह सीख दे रहा है कि कोई भी टीम कोई तोप नही हैं बस विकेट ही मुख्य वजह है टीम की जीत या हार की। 

अगर बात की जाए गेंदबाजों की तो कोई भी गेंदबाज तभी प्रभावशाली होता है जब पिच का सपोर्ट मिलता है बिना पिच के सपोर्ट के जो गेंदबाज विकेट निकाल सके और रन रोक सके वही असल में गेंदबाज है। हमने बङे बङे गेंदबाजों को फ्लैट विकेट पर 10 ओवरों में सौ रन खाते हुए भी देखा है और पांच विकेट लेते हुए भी देखा है। गेंदबाज वही सच्चा गेंदबाज है जो विकेट लेने के लिए पिच के सपोर्ट पर निर्भर न रहे। महान शेन वार्न इस श्रेणी मे आते हैं जो आस्ट्रेलियाई विकेटों पर भी विकेट निकाल लेते थे।

सेना देशों में इस विश्वकप न्यूजीलैंड एकमात्र ऐसी टीम है जो स्पिनरों के सामने अभी तक रन बनाते हुए दिखी है। न्यूजीलैंड टीम की खासियत है कि उनके पास रचिन रवीन्द्र, डेवोन कानवे हैं जो किसी भी पिच पर रन बना सकते हैं। इंग्लैंड की टीम में एकमात्र बेन स्टोक्स ही वैसे खिलाङी दिखे जो पिच के सपोर्ट से रन नही बनाते हैं और शायद इसी की नतीजा है कि अकेले स्टोक्स भी इस विश्वकप इंग्लैंड को ट्रैक पर नही ला पा रहे हैं। पिछले वर्ष विश्वकप मे राशिद खान जैसा स्पिनर मोर्गन का शिकार बन गया था तो ही विकेट और पिच की मदत का मामला सामने आया था। 

साफ है कि बल्लेबाज और गेंदबाज दोनो की सफलता पिच पर निर्भर है और इसी वजह से जो टीमें पिच पर निर्भर हैं वह निचले क्रम पर हैं और जो टीमें किसी भी ट्रैक पर रन बनाने में सक्षम हैं वह टाप पोजिशन पर हैं। इसलिए इंग्लैंड की हार और इस विश्वकप से विदाई होना कोई बहुत बङी आश्चर्य की बात नही है। आज विश्वकप के 25वें मैच में श्रीलंका ने इंग्लैंड को हराकर इंग्लैंड टीम के लिए घरवापसी का टिकट लगभग कंफर्म करवा दिया है।

क्या आपको भी लगता है कि पिच ही सबसे बङी वजह होती है किसी बल्लेबाज,गेंदबाज या टीम की सफलता की?
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