फुटबॉल का हर आयोजन हमें कोई न कोई हीरो देकर जाता है। यूरो-2024 के सबसे बड़े हीरो

फुटबॉल का हर आयोजन हमें कोई न कोई हीरो देकर जाता है। यूरो-2024 के सबसे बड़े हीरो क्रिश्चियन एरिक्सन हैं। इसलिए नहीं कि एरिक्सन में रोनाल्डो जैसी चपलता है या मैसी जैसे सुपरस्किल्स हैं, बल्कि इसलिए कि 32 वर्षीय एरिक्सन हमें ज़िंदगी जीने का हौंसला देते हैं।
अभी तीन साल पहले की ही तो बात है। 12 जून 2021 को एरिक्सन डेनमार्क की तरफ से फिनलैंड के ख़िलाफ मैच में खेलने उतरे। मैच हाफ टाइम की तरफ बढ़ रहा था। दोनों टीमें अभी 0-0 की बराबरी पर थी तभी मैदान पर एक अनहोनी घटना घटी। पांच बार डेनमार्क के प्लेयर ऑफ द इयर रहे क्रिश्चियन एरिक्सन अचानक गिर पड़े।
मैच रोका गया। मेडिकल टीम मैदान पर आई और पता चला कि एरिक्सन को दिल का दौरा पड़ा है। प्राथमिक चिकित्सा के बाद उन्हें तुरंत मैदान से अस्पताल ले जाया गया। जहां डाक्टरों का डर सही निकला। एरिक्सन को दिल का दौरा पड़ा था। 
उनका ऑपरेशन किया गया और इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफाइब्रिलेटर इंसर्शन के बाद घर भेज दिया गया। लोगों ने मान लिया कि एरिक्सन का फुटबाल करियर अपने चरम पर पहुंचने से पहले ख़त्म हो गया। 
एरिक्सन उस वक़्त 28 साल के थे और इटालियन लीग में इंटर मिलान के लिए मिडफील्ड में खेल रहे थे। सर्जरी के आठ महीने बाद उन्होंने दोबारा मैदान पर उतरने का मन बनाया लेकिन इटली में नियम उनके आड़े आ गए। आख़िरकार उन्होंने इंटर मिलान को अलविदा कहा और वापस इंग्लिश लीग में लौट आए। 2022 में उन्होंने ब्रेंटफोर्ड के लिए खेलना शुरु किया। कुछ ही दिन बाद उनका अनुबंध मैनचेस्टर यूनाइटेड से हो गया। और मौत के बिस्तर से उठकर ये खिलाड़ी एक बार फिर से मैदान पर मैच की दिशा तय करने लगा।
एरिक्सन एक बार फिर से यूरो में डेनमार्क का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 16 जून 2024 को उन्होंने स्लोवेनिया के ख़िलाफ खेलते हुए मैच के 17वें मिनट में अपनी टीम के तरफ से हुआ एकमात्र गोल किया। ये उनके जीवन का ही नहीं, फुटबॉल के इतिहास का भी विलक्षण क्षण गिना जाएगा। मौत के बिस्तर से उठकर खेल में पुनर्जीवित होना अपने आप में ऐतिहासिक है। 
जीने की लालसा और दोबारा से करियर ज़िंदा करने का जो जीवट एरिक्सन ने दिखाया है वो आम व्यक्ति के लिए अकल्पनीय है। उनका जीवन हमारे लिए मिसाल है और उन लोगों के लिए सबक़ जो एक घटना से टूट जाते हैं, बिखर जाते हैं। हम बेहद ख़ुशक़िस्मत है। हमने फिनिक्स नहीं देखा लेकिन हमने क्रिश्चियन एरिक्सन को देखा है 😍

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जयपाल सिंह मुंडा झारखंड के खूंटी जिले में जन्मे थे. ( 3 जनवरी 1903 – 20 मार्च 1970). वे एक जाने माने राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखक, संपादक, शिक्षाविद् और 1925 में ‘ऑक्सफर्ड ब्लू’ का खिताब पाने वाले हॉकी के एकमात्र अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी

راہ عزیمت کا مسافر(مجاہد دوراں سید مظفر حسین کچھوچھوی)

MANUU awards PhD to Amatur Rehman Maimoona