मुसलमान #musalman

उलमा ने अगर दुनियावी तालीम को ज़्यादा तरजीह न दी या उस पर ज़्यादा तवज्जो न देने को कहा तो उसकी एक वजह यह भी है कि अक्सर मुस्लिम नौजवान जब दुनियावी तालीम हासिल करने लगता है तो दीन से दूर हो जाता है।

उनका रहन सहन , उनका हुलिया सब गैर इस्लामी हो जाती है बाज़ तो दीन ए इस्लाम से बगावत करने लगते है और बाज़ खुद को मुस्लिम कहने हिचकिचाहट महसूस करते है।

बहुत से ऐसे मुसलमान देखें है जो बेहतरीन तालीम हासिल करने के बाद ख़ुद को मुस्लिम समुदाय से हटकर पेश करते है गरीब मुसलमान , अनपढ़ मुसलमान को हिकारत की नज़र से देखते है।

इसीलिए सर इक़बाल ने कहा था कि आप दुनियावी तालीम हासिल कीजिये ज़रूर हासिल कीजिये लेकिन अपनी पहचान के साथ अपने ईमान पर साबित कदम रहकर..!

मौलाना तारिक़ साहब का एक बयान सुना था काफी दिन पहले वह कह रहे थे कि आप अपने बच्चों को डॉक्टर बनाइये , इंजीनियर , वैज्ञानिक बनाइये इसमें कोई हर्ज नही लेकिन उनको आप सबसे पहले यह ज़रूर बताइए कि आपके दुनिया मे आने का मकसद क्या है ? आपको किसने पैदा किया ? आपका हक़ीक़ी खालिक व मालिक कौन है ? 

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