2010 में जैसे ही #FIFA ने एलान हुआ फुटबॉल #वर्ल्डकप 2022 की मेजबानी #QATAR को मिली है यूरोपीय देशों के छाती पर सांप लेटने लगे.

2010 में जैसे ही FIFA ने एलान हुआ फुटबॉल वर्ल्डकप 2022 की मेजबानी QATAR को मिली है यूरोपीय देशों के छाती पर सांप लेटने लगे.

यूरोपीय देश खुद को श्रेष्ठ और पृथ्वी का शासक वर्ग मानते हैं. उन्हें बर्दाश्त नही फुटबॉल वर्ल्डकप की मेजबानी किसी मुस्लिम गल्फ देश को मिले.

यूरोपीय देश खुद को ब्राह्मण मानते हैं. क्षत्रिय का दर्जा अमेरिका के पास है. चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया और सिंगापुर बनिया हैं. मिडिल ईस्ट एशिया और भारत के आसपास के देश शूद्र वर्ग में आते हैं. अफ्रीका को अछूत और लैटिन अमेरिकी देशों को आदिवासी माना जाता है.

QATAR कभी घुमंतू यानी खानाबदोश था. आज धन संपत्ति और खनिज संपदा यानी तेल के मामले में सबसे अमीर मुल्क है. इसके बावजूद उसके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है. आज भी मानवाधिकार हनन और अप्रवासी मजदूरों के मौत का मामला उठाकर वर्ल्डकप की मेजबानी पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं.

सऊदी अरब, क़तर और दुबई के पाया बहुत पैसा है, ऊंचे गगनचुंबी इमारतें हैं, सुंदर चौड़ी सड़कें हैं, आलीशान मॉल है. इसके बावजूद यूरोपीय देश खाड़ी देश, अफ्रीका और कई एशियाई देशों से अधिकतर मामलों में भेदभाव करते हैं.

इसका मतलब है शूद्र और अछूत देश आर्थिक रूप से कितना भी अमीर बन जाए लेकिन सामाजिक रूप से उनकी जाति के कारण उन्हें पिछड़ा ही माना जाता है.

✍🏼✍🏼Kranti Kumar 

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