हिन्दू-मुस्लिम, नमाज़-चालीसा यह करने के पीछे का षड्यंत्र समझो

हिन्दू-मुस्लिम, नमाज़-चालीसा यह करने के पीछे का षड्यंत्र समझो। कोई भी मीडिया या व्यक्ति खुलकर नहीं बताता कि आख़िर विवाद की वजह क्या है? और क्यों यह सब हुआ है? लखनऊ का लुलु मॉल जिसमें सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिसका उद्घाटन किया हो, आखिर उसमें विवाद क्या घटित हुआ और किसने किया?

पहले यह समझें कि यह मॉल केरल के व्यवसायी यूसुफ अली का मॉल है, जो भारत का 2000 करोड़ में बना, सबसे बड़ा शॉपिंग मॉल है। यूसुफ अली के लगभग 22 देशों में 235 से अधिक रिटेल स्टोर उपलब्ध है। यूसुफ अली के भारत में ही बैंकिंग सेक्टर से लेकर इन्फ्रास्ट्रक्चर तक और एविएशन लेकर अन्य कई क्षेत्रों में शेयर, हिस्सेदारी इत्यादि है। 

अब आप इत्मीनान से सोचिये कि दिक्कतें किसे होती है? जिन्हें दिक्कत हुई उन्होनें नकली जालीदार टोपी खरीदकर मॉल में घुसे और 18 सेकंड का वीडियो शूट कर डाला, फोटो लिए और तुरन्त निकल गये। ख़बर फैलाई गई कि मॉल में नमाज़ पढ़ी गयी। वैसे तो मैने देखा ही है कि हर मॉल में एक पंडित जी बैठे होते हैं तो फिर नमाज़ से समस्या क्या?

असल में बात यह साबित करवानी थी कि नमाज हो सकती है तो धर्मनिरपेक्ष देश में हनुमान चालीसा क्यों नहीं? एकबार चालीसा का पाठ हो जाता तो मन्दिर भी बनवाने की जिद होती लेकिन सीसीटीवी कैमरों ने खेल बिगाड़ दिया और बिगड़ते माहौल को बचा लिया। वहां नमाज़ पढ़ने कोई जानबूझकर माहौल खराब करने व अपना माहौल बनाने गए थे। 

विवाद तो इसपर भी नहीं हुआ जब देश के प्रधानमंत्री ने संसद भवन की छत पर पंडित बुलाकर पूजा करवाई जबकि संसद तो सभी धर्मों और मान्यताओं का भी केंद्रबिंदु है फिर केवल पंडित ही क्यों बुलाये गये? लेकिन इसपर सवाल नहीं उठे क्योंकि किसी को इन पचड़ों में दिलचस्पी नहीं है लेकिन अब समझो कि कैसे लुलु मॉल की दिलचस्पी इतने दिनों तक दिलचस्प बनाई गई? #आर_पी_विशाल।

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