स्वतंत्र भारत अपनी आज़ादी का पचहत्तरवाँ साल गिरह मना रहा है

कई बार इतिहास अपनी पीछे लौटने की गति पर हंसता है । स्वतंत्र भारत अपनी आज़ादी का पचहत्तरवाँ साल गिरह मना रहा है । जिसने अंग्रेज़ी साम्राज्य से लड़ कर देश को आज़ादी “ दी “ आज उसे ही देश निकाला के उपक्रम में डाला जा रहा है । यहाँ हमने “ दिलाई “ 
 नहीं , “ दी “ लिखा है । “दी “ और “दिलाई “ में बहुत लम्बा फासला है । 1947 में अंग्रेज़ी हुकूमत भारत को दो टुकड़े में बाँट कर देश को आज़ाद घोषित कर दिया । 
इतिहास यहाँ से चुप्पी में चला जाता है , क्यों की इतिहास लिखनेवाले अधिकतर वामपंथी थे , उन्होंने बड़ी चतुरायी से “ अंग्रेज के बाद का भारत “ का हिस्सा ही अंधेरे में डाल दिया । भारत और पाकिस्तान दो मुल्क बने । भारत में कांग्रेस और पाकिस्तान में मुस्लिम लीग के हाथ सत्ता आयी । अब भारत में कांग्रेस को तय करना था की देश को किस तंत्र से चलाया जाय ? यह मुकम्मिल तौर पर कांग्रेस के हाथ था , इस आज़ादी में कांग्रेस के अलावा किसी दूसरे का हाथ नहीं था । संघ और सावरकर की हिंदू महा सभा खुल्लम खुल्ला अंग्रेज़ी हुकूमत के साथ था । साम्यवादी अपने “ अंतराष्ट्रीय “ जुड़ाव के चलते अंग्रेजों का समर्थन कर रहे थे , मुस्लिम लीग को पाकिस्तान एक अलग का मुल्क चाहिये था , और यह बग़ैर अंग्रेजों हुकूमत के समर्थन से मिल नहीं सकता था , राजा , रजवाड़े के बहुमत को यह ख़याल था की अगर अंग्रेज यहाँ रह गये तो उनकी ज़मींदारी बची रहेगी । सब के अलग अलग कारण थे इसलिये ये सारी ताकते अंग्रेज़ी साम्राज्यवाद की पालकी थामे खड़े थे , 1942 से शुरू हुआ “ अंग्रज़ो भारत छोड़ो “ का जंग अकेले कांग्रेस लड़ रही थी । चुनांचे जब अंग्रेज जाने लगे तो सत्ता की वागडोर कांग्रेस को सौंप दी । हिंदुस्तान आज़ाद होगा तो कैसा होगा , इसका ख़ाका केवल कांग्रेस के पास था जिसे 1909 में ही गाँधी जी ने लिख दिया था । इस पुस्तक का नाम है “हिंद स्वराज “ । ख़ुद मुखतारी यानी जनता की अपनी सरकार । 
 कांग्रेस अगर चाहती तो साम्यवादी तर्ज़ पर “ एकपार्टी”
की सरकार बना सकती थी । कांग्रेस अगर चाहती तो कुछ चुनिन्दा लंगों को विशेषाधिकार दे कर बाक़ी अवाम को रिआया बना कर दर्शक दीर्घा में रख देती । लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं किया बल्कि देश में “ बहुदलीय “ व्यवस्था दिया और आम आदमी को 
   “ वोट देने “ और अपनी सरकार बनाने का हक़ दिया । दुनिया का यह अकेला मुल्क है जिसे बग़ैर संधर्ष किए 
वोट का अधिकार मिला है । इतना ही नहीं , कांग्रेस ने अन्य दलों को बा इज़्ज़त फलने फूलने का मौक़ा दिया जिससे देश में जनतंत्र बना रहे । 
      सत्तर साल आते आते इतिहास फिर घूम कर 47 में जा खड़ा हुआ है । कांग्रेस फिर अकेली है बाक़ी ? 
प्रकारांतर से फ़ासीवाद के समर्थन में । लेकिन जनता ? 
     भारत जोड़ो यात्रा की कहानी देखी सुनी जा सकती है । #chanchalBHu
#BharatJodoYatra

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